महामहिम, आजीवन राष्ट्रपति, फील्ड मार्शल डॉक्टर ईदी अमीन। धरती के प्राणियों, समुद्र की मछलियों का मालिक और युगांडा में ब्रिटिश साम्राज्य का विजेता।’ (25 जनवरी 1971 को युगांडा में तख्ता पलट के बाद ईदी अमीन ने राष्ट्रपति बनते हुए खुद को यही उपाधि दी थी।)

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पूर्वी अफ्रीकी देश युगांडा कभी भारतीयों के ऐसे पनाहगार के रूप में जाना जाता था, जहां देश के गुलामी के समय अंग्रेज सरकार भारतीय श्रमिकों को ले गयी- इनका काम था ब्रिटिश साम्राज्य के उपनिवेश युगांडा में रेलवे लाइन बिछाना। श्रमिक मुहैया कराने का ठेका दिया गया था कराची के अलीभाई जीवन भाई को। काफी संख्या में गुजराती और पंजाबी श्रमिकों को भर्ती किया गया।

वर्षों बाद भारत के आजाद होने और 1962 में युगांडा की आजादी के बाद तक ये श्रमिक और उनका परिवार युगांडा में ही बस गए। इन श्रमिकों और उनके बच्चों ने कठिन श्रम और लगन के साथ काम करते हुए वहां ऐसी तरक्की हासिल कर ली, जिनकी युगांडा के व्यापार और उद्योग पर सबसे ज्यादा पकड़ थी। वे चीनी, चाय और कॉफी सहित दूसरे व्यापार के जरिये समृद्धि के मामले में काफी आगे थे।

साल 1971 में युगांडा में तनाशाह ईदी अमीन ने तख्ता पलट कर दुनिया के सामने क्रूर निजाम का उदाहरण पेश किया जो 1979 तक जारी रहा। उसने अगस्त 1972 को उसने ऐलान किया- ‘इन खून चूसने वाले विदेशियों को बाहर करो।’

उसने एशियाई मूल के लोगों को देश निकाला दे दिया। इसके लिए 90 दिनों का समय दिया गया। बाहर जाने वालों को केवल 55 पाउंड तक ले जाने का अधिकार था। करीब 40 हजार भारतीयों पर इस आदेश का गहरा असर पड़ा। जिनका घर-व्यापार और भविष्य सबकुछ अचानक तबाह हो गया। एशियाई मूल के लोगों की संपत्ति पर कब्जा कर लिया गया।

दहशत में एशियाई समुदाय के लोग औने-पौने दाम में सबकुछ बेचकर ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा सहित दूसरे देश भागने लगे। भारत सरकार ने इसे युगांडा का आंतरिक मामला ठहरा दिया जिससे वहां के भारतीयों का मोहभंग हो गया।

ईदी अमीन का परिवार कैथोलिक ईसाई था, जिसने बाद में इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था। छह बीवियां, कई प्रेमिकाएं और 45 बच्चों का पिता तनाशाह ईदी अमीन 1979 तक युगांडा का राष्ट्रपति रहा। वह इतना क्रूर था कि उसे युगांडा का कसाई कहा गया। यहां तक कि उसके नरभक्षी होने की भी खबरें आईं।

उसके शासन के दौरान युगांडा में गहरा असंतोष और विद्रोह पनपता रहा जिसे उसने बर्बर तरीके से दबाने की कोशिश की। विद्रोही तंजानिया भागकर गए तो ईदी अमीन ने तंजानिया के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया, जो उसकी आखिरी भूल साबित हुई। उसे अपने ही देश से भागकर लीबिया और बाद में सऊदी अरब में शरण लेनी पड़ी। 2003 में उसकी मौत हो गयी।

अन्य अहम घटनाएं:

1930ः हिंदी के प्रख्यात लेखक और पत्रकार राजेंद्र अवस्थी का जन्म।

1958ः जानी-मानी गायिका कविता कृष्णमूर्ति का जन्म।

1971ः हिमाचल प्रदेश की स्थापना।

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