ग्रुप-डी भर्ती मामले में सीबीआई करेगी जांच : हाई कोर्ट

98
Calcutta High Court
Calcutta High Court

कोलकाता : कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य के स्कूल सर्विस कमीशन में ग्रुप डी की भर्ती में धांधली होने के मामले में सीबीआई से जांच कराने का आदेश दिया है।
सोमवार को न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय ने कहा कि स्कूल सेवा आयोग के ग्रुप डी स्टाफ की भर्ती के मामले में हुई धांधली की सीबीआई जांच के अलावा कोई रास्ता नहीं है। सुनवाई के दौरान सीबीआई जांच का विरोध करते हुए एसएससी के वकील किशोर दत्ता ने अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कोर्ट से सीबीआई को छोड़कर राज्य में किसी भी जांच एजेंसी से जांच कराने का अनुरोध किया था। दत्ता ने सुप्रीम कोर्ट की कई टिप्पणियों का जिक्र किया। इस पर न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय ने कहा, ‘आपको जो कहना है उसके लिए मैं आपको पांच मिनट का समय दूंगा। आप क्यों नहीं समझते कि आप केस हार गए हैं। आपके हलफनामे से स्पष्ट हो गया है कि नियुक्ति नियमानुसार नहीं की गई थी। मैंने तय कर लिया है जांच के लिए सीबीआई को निर्देश दिया जाएगा।’ महाधिवक्ता (एजी) ने कहा, ‘मैं सीबीआई से जांच नहीं कराने का अनुरोध करता हूं। राज्य पुलिस पर भरोसा किया जाए। राज्य पुलिस के खिलाफ एक भी शिकायत नहीं है कि उन्होंने उचित जांच नहीं की।’ उन्होंने आगे कहा कि किसी भी सेवानिवृत्त जज से जांच कराने में कोई दिक्कत नहीं है। एजी ने अदालत को यह भी बताया कि राज्य पुलिस जांच के संबंध में एक हलफनामा प्रस्तुत करना चाहती है।

Advertisement

इस पर न्यायाधीश कहा, “घटना में राज्य की संलिप्तता के कारण, इसकी जांच किसी भी राज्य एजेंसी से नहीं कराई जा सकती।” कोर्ट ने आगे कहा कि सीबीआई को जांच टीम बनानी चाहिए। टीम का नेतृत्व एक संयुक्त निदेशक और डीआईजी या एसपी रैंक का एक अधिकारी करेगा। इतना ही नहीं, जांच टीम में कोई भी अधिकारी जांच के दौरान बाहर नहीं जा सकता है। न्यायाधीश ने यह भी निर्देश दिया कि जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट 21 दिसंबर को अदालत में पेश की जाए।

उल्लेखनीय है कि 2019 में कोर्ट में मुकदमा दायर कर आरोप लगाया गया था कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती पैनल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी काफी नियुक्तियां की गईं। शुरुआत में आयोग पर अनियमितता के आरोप लगे लेकिन आयोग ने बुधवार को कोर्ट को बताया था कि उसने नियुक्ति के संबंध में कोई सिफारिश नहीं की है। उन्होंने गुरुवार को एक हलफनामा भी सौंपा था। नतीजतन, सवाल उठता है कि अगर एसएससी ने सिफारिश नहीं की तो वे नियुक्तियाँ कैसे हुई हैं?

Advertisement

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here