गैंगरेप के दोषियों को 20 वर्ष का सश्रम कारावास, पीड़िता को 7.5 लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश

गिरफ्तारी के बाद से ही आरोपित जेल में थे। इस मामले में कुल 13 लोगों की गवाही हुई। गवाही देने वालों में पीड़िता की आठ वर्षीया नाबालिग बेटी भी शामिल थी।

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सिउड़ी : बीरभूम जिले के बोलपुर महकमा अदालत ने इलामबाजार थानान्तर्गत धल्ला ग्राम पंचायत के फूलभांगा ग्राम में वर्ष 2018 में हुए एक गैंगरेप के मामले में गुरुवार को अपना फैसला सुनाते हुए घटना के दोषियों को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को यह निर्देश दिया कि वह पीड़िता को 7.5 लाख रुपये का मुआवजा दे।

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उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में 29 जनवरी को सरस्वती पूजा होने के कारण गांव में चारों ओर तेज आवाज में माइक बज रहा था और गांव के ही एक घर में एक महिला अपने दो नाबालिग बेटियों के साथ सो रही थी। महिला का पति घर पर नहीं था। इसी समय महिला के घर में ही गांव के चार युवक शुकु हेम्ब्रम, सरकार माड्ढी, मंत्री किस्कू और रवि बेसरा घुसे और महिला को उसके घर से जबरन उठाकर पास के जंगल में ले गए और उससे सामूहिक दुष्कर्म किया।

सरस्वती पूजा होने के कारण चारों ओर तेज आवाज के साथ माइक बज रहे थे। इसलिए महिला की चीख-पुकार किसी को सुनाई नहीं पड़ी। लेकिन महिला की आठ वर्षीया नाबालिग बेटी ने सब कुछ अपनी आंखों के सामने होता हुआ देखा था। अगले ही दिन इलामबाजार थाने में मामले की लिखित शिकायत दर्ज हुई और पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

इस मामले के सरकारी वकील तपन दास ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद से ही आरोपित जेल में थे। इस मामले में कुल 13 लोगों की गवाही हुई। गवाही देने वालों में पीड़िता की आठ वर्षीया नाबालिग बेटी भी शामिल थी। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने सभी आरोपितों को दोषी करार दिया और गुरुवार को अतिरिक्त जिला दायरा न्यायाधीश सुजय कुमार सेनगुप्ता ने चारों दोषियों को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना न देने की सूरत में दोषियों को एक वर्ष अधिक कारावास में बिताना होगा। इसके अलावा अदालत ने राज्य सरकार को पीड़िता को 7.5 लाख रुपये का मुआवजा देने के भी निर्देश दिए।

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