कोलकाता : नंदीग्राम आंदोलन में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देने को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। शनिवार को तृणमूल कांग्रेस के राज्य महासचिव और प्रवक्ता कुणाल घोष ने सबसे पहले शहीद वेदी पर जाकर पुष्पांजलि अर्पित की और शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद भारतीय जनता पार्टी और शुभेंदु अधिकारी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस माकपा ने यहां लोगों को गोली मारकर मौत के घाट उतारा था उसी माकपा का समर्थन आज भाजपा कर रही है। उन्होंने कहा कि नंदीग्राम में लोगों को हक के लिए आवाज उठाने पर शहीद कर दिया गया था। जिनके लिए लोग शहीद हुए हुए वे आज दूसरी पार्टियों में जाकर तृणमूल को ही निशाना बना रहे हैं, ऐसे एहसान फरामोश लोगों को सबक सिखाना होगा।

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इधर कुछ देर बाद शुभेंदु अधिकारी भी वहां पहुंचे और शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने कुणाल घोष और तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। शुभेंदु ने कहा कि शहीदों के नाम पर माल्यार्पण कर केवल राजनीति हो रही है। इतने सालों से जिनकी सरकार है उनके लिए लोग शहीद हुए थे लेकिन आज तक उन परिवारों को न्याय नहीं मिला। माकपा के कई नेता और वे सारे पुलिस अधिकारी आज तृणमूल के बेहद खास बन गए हैं जिन्होंने गोलियां चलवाई और लोगों को मौत के घाट उतारा। मौत पर राजनीति करना आज राज्य की मुखिया और सत्तारूढ़ पार्टी का मुख्य आधार बन गया है।

शुभेंदु ने कहा कि बंगाल में केंद्र सरकार लोगों की भलाई के लिए जो भी रुपये भेज रही है उसका गबन तृणमूल के नेता लगातार कर रहे हैं। आवास योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। अभी तो तीन सदस्यों की एक टीम आई थी। जांच करने के लिए जल्द ही 15 सदस्यों की एक टीम आ रही है जो राज्य में भ्रष्टाचारियों को ढूंढ ढूंढ कर निकालेगी।

नंदीग्राम से विधायक शुभेंदु ने शहीदों की बेदी पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी और एक बार फिर यहां से ममता बनर्जी को मात देने को याद दिलाते हुए कहा कि लोगों ने शहीद के नाम पर वोट बटोरने वाले को पहचान लिया था इसलिए इस बार सबक सिखाया है और अब हमेशा सिखाएंगे।

उल्लेखनीय है कि वाममोर्चा शासन के दौरान वर्ष 2005-2006 में राज्य सरकार ने नंदीग्राम के स्थानीय किसानों की सहमति के बगैर उद्योग के लिए जमीन अधिग्रहण शुरू किया था जिसके खिलाफ किसान एकजुट होने लगे थे। उनका नेतृत्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया और करीब 11 महीनों तक यहां व्यापक आंदोलन होता रहा। एक तरफ राज्य पुलिस और सत्तारूढ़ माकपा के कैडर थे तो दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस और स्थानीय लोग थे। 7 जनवरी, 2007 को नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे ग्रामीणों पर फायरिंग की वारदात हुई थी, जिसमें तीन लोग भरत मंडल, शेख सलीम तथा विश्वजीत माईती की मौत हो गई थी। इन्हीं की स्मृति में तृणमूल कांग्रेस हर साल 7 जनवरी को शहीद दिवस मनाती है।

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