नेताजी को अपना बनाने की होड़, अब राज्य ने एक ट्राम का नामकरण किया सुभाष के नाम पर

गड़ियाहाट में इस ट्राम पर नेताजी की प्रतिमा लगाई गई है और तस्वीरों के जरिए आजादी के उनके संघर्षों को दर्शाने की कोशिश हुई है।

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कोलकाता : आजादी के महानायक और बंगाल के सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अपना बताने की होड़ केंद्र और राज्य सरकारों के बीच लगी है। आजाद हिंद फौज और नेताजी से संबंधित पश्चिम बंगाल की झांकी को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल करने से केंद्र के इनकार के बाद राज्य सरकार केंद्र पर हमलावर हो गई थी।

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उसके बाद केंद्र ने इंडिया गेट पर नेताजी की मूर्ति लगाने की घोषणा कर दी है। अब इस तरफ एक कदम और बढ़ाते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की ऐतिहासिक पहचान रहे एक ट्राम को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर समर्पित किया है। शनिवार को इसका उद्घाटन राज्य परिवहन निगम के चेयरमैन मदन मित्रा ने किया।

मिली जानकारी के अनुसार गड़ियाहाट में इस ट्राम पर नेताजी की प्रतिमा लगाई गई है और तस्वीरों के जरिए आजादी के उनके संघर्षों को दर्शाने की कोशिश हुई है। उद्घाटन के मौके पर मदन मित्रा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि केंद्र को जवाब देने के लिए राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। वर्तमान में भाजपा की सरकार बंगाल के सपूतों और संस्कृति का अपमान कर रही है। ट्राम का नाम दिया गया है “बलाक”।

मित्रा ने बताया कि ट्रेन के अंदर नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित कई सारी किताबें रखी गई हैं। रविवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती है इसलिए उस दिन से 26 जनवरी तक इस ट्राम को श्याम बाजार पांच प्वाइंट क्रॉसिंग पर रखा जाएगा। 27 जनवरी से 31 जनवरी तक यह ट्राम धर्मतल्ला में रहेगी। उन्होंने बताया कि साधारण लोग बिना मूल्य इसमें चढ़कर नेताजी से संबंधित चीजों को देख सकेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार चाहे बंगाल की विभूतियों का जितना अपमान कर ले लेकिन बंगाल किसी का मोहताज नहीं, हम अपने सपूतों को सम्मान देना जानते हैं।

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