कोलकाता : लिटरेरिया 2021 का तीन दिवसीय कार्यक्रम आज संपन्न हुआ। आज सर्वप्रथम ‘बांग्ला डॉट कॉम’ की टीम द्वारा बाउल गीतों की प्रस्तुति की गई। लिटरेरिया के तीसरे संवाद सत्र में मन्नू भंडारी के उपन्यास ‘महाभोज’ पर आधारित संवाद सत्र आयोजित किया गया। इस विषय पर आशुतोष ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज की राजनीति में रीढ़ तो गायब हो चुकी है और दुम को हम छिपाते नहीं, लहराते चलते हैं। इतु सिंह ने कहा कि बहुत कम महिला रचनाकारों ने राजनीति पर लिखा है। आज के सन्दर्भ में महाभोज हमें वर्तमान का सत्य बताता हुआ दिखाई देता है। राहुल सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि प्रेम के जिस रूप को देखने के हम अभ्यस्त हैं, महाभोज में प्रेम का वह रूप दिखाई नहीं पड़ता है। महाभोज स्वप्न के दु:स्वप्न में बदलने की कथा है। इस सत्र का संचालन दिनेश राय ने किया। चौथा संवाद सत्र उदय प्रकाश की कहानी ‘मोहनदास’ पर केंद्रित था।

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इस संवाद सत्र में डॉ संजीव ने अपने वक्तव्य में कहा कि मोहनदास कहानी की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह त्रासदी को अनुभव कराती है। राकेश बिहारी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि लेखक मोहनदास नहीं बन पाया। वह अपने सामाजिक बोध की जो समझ है, उसे अपने पात्र के ऊपर थोप देता है। विनय मिश्र ने कहा कि मोहनदास कूट कथाओं का पुंज है। मोहनदास के नाम को हम भले ही अपनाएंगे पर उसको चलने नहीं देंगे। प्रियंका साह ने अपने वक्तव्य में कहा कि मोहन दास के साथ यह उन लोगों की भी कहानी है जो उसकी तरह ही संघर्ष करते हैं। संवाद सत्र का संचालन आशीष मिश्र ने किया। इस दिन के मुख्य आकर्षण में से एक था देश भर से आए महत्वपूर्ण कवियों का कविता पाठ जिसमें हिस्सा लेने वाले कवियों में शामिल थे आर. चेतनक्रांति, कृष्ण मोहन झा, विजय चोरमारे, लीना मल्होत्रा, वंदना टेटे, पीयूष दईया, कविता कादंबरी और अंकिता शाम्भवी। कविता सत्र का संचालन आनंद गुप्ता ने किया।


इस दिन समापन सत्र में सबसे पहले नीलांबर की टीम द्वारा दुष्यंत कुमार, राजकमल चौधरी, रघुवीर सहाय और नरेश सक्सेना की कविताओं पर आधारित कोलाज की प्रस्तुति की गई। जिसमें हिस्सा लेने वाले कलाकारों में शामिल थे – स्मिता गोयल, पूनम सोनछात्रा, रचना सरन, सुधा तिवारी और चयनिका दत्ता। इसके बाद प्राची गोंडचवर और ममता शर्मा द्वारा काव्य संगीत की प्रस्तुति की गई। इस सत्र का संचालन अनिला राखेचा ने किया। अंत में विनय शर्मा द्वारा निर्देशित एवं कुलभूषण खरबंदा, चेतना जालान, अनुभा फतेहपुरिया एवं कल्पना झा अभिनीत नाटक ‘आत्मकथा’ का मंचन किया गया। नीलाम्बर द्वारा सामाजिक कार्य के लिए वर्ष 2021 का ‘निनाद सम्मान’ स्वर्गीय अपराजिता शर्मा को एवं नाटकों के लिए ‘रवि दवे स्मृति सम्मान’ चेतना जालान को दिया गया। इस अवसर पर चेतना जालान ने कहा कि निर्देशक अभिनेता के आंतरिक कला को निखारता है, संवारता है। कलाकार सिर्फ बाह्य शरीर लेकर थिएटर में जाता है, आंतरिक बुनावट निर्देशक का ही होता है। प्रभाकर लाल कर्ण ने कहा कि हमें अपराजिता के काम को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना होगा एवं हिमोजी कला को विस्तार देना होगा। सत्र का संचालन क्रमशः ममता पांडेय एवं कल्पना झा ने किया। पूरे कार्यक्रम के लिए धन्यवाद ज्ञापन मृत्युंजय कुमार सिंह ने दिया। कार्यक्रम को देखने के लिए बहुत संख्या में साहित्यप्रेमी कोलकाता एवं देश के विभिन्न हिस्सों से आकर उपस्थित थे।

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