कोलकाता : कोलकाता नगर निगम (केएमसी) चुनाव का बिगुल बज चुका है। सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस केएमसी बोर्ड पर अपना कब्जा बरकरार रखने तो भारतीय जनता पार्टी निगम बोर्ड पर कब्जा करने के लिए दमखम लगा रही है। इस बार कांग्रेस ने भी सभी 144 वार्डों में उम्मीदवार उतारे हैं और माकपा भी 120 से अधिक वार्ड में प्रतिद्वंदिता कर रही है।

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विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी ने प्रचंड जीत हासिल की है जबकि दो साल पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने भी राज्य में 42 में से 18 सीटों पर जीत दर्ज करने के साथ ही विधानसभा में भी अपनी स्थिति मजबूत की है। अब मुकाबला नगर निगम के चुनाव में है। यहां तृणमूल कांग्रेस के सामने 2015 की अपनी जीत को बरकरार रखने की चुनौती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी के सामने राज्य में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने की चुनौती है। इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प इसलिए भी है क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टी ने केवल उन लोगों को टिकट दिया है, जिनके प्रति लोगों में किसी तरह की नाराजगी नहीं है। भाजपा ने भी लीक से हटकर जमीनी पकड़ रखने वाले उन नेताओं को टिकट दिया है, जो चुनाव मैनेजमेंट अथवा इलेक्शन एजेंट का कार्यभार संभालते रहे हैं।

इस चुनाव को लेकर राजनीतिक विशेषज्ञ विश्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा कि यह तो सुनिश्चित है कि केएमसी चुनाव में जीत सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस की ही होगी, लेकिन भारतीय जनता पार्टी भी एक बड़ा फैक्टर जरूर है। पुराने आंकड़ों का जिक्र करते हुए विश्वनाथ ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद शहर में भाजपा मजबूत हुई है। भले ही विधानसभा चुनाव में यहां बहुत अच्छा परिणाम पार्टी का नहीं रहा लेकिन जनाधार में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा माकपा और कांग्रेस के पारंपरिक मतदाता भी तृणमूल के खिलाफ भाजपा की ओर झुके हैं। पुराने आंकड़ों का जिक्र करते हुए चक्रवर्ती ने बताया कि विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद कोलकाता नगर निगम में भी चुनाव जीतने की संभावना प्रबल पहले से ही है। इस बीच माकपा और कांग्रेस के अलग-अलग चुनाव लड़ने का लाभ भी पार्टी को मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि जिन सीटों पर विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी बहुत कम अंतर से हारी थी, वहां माकपा व कांग्रेस के अलग-अलग चुनाव लड़ने की वजह से पार्टी को लाभ मिल सकता है। उन्होंने संभावना जताई कि भाजपा कोलकाता के कम से कम 10 वार्डों में जीत दर्ज कर सकती है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 के निकाय चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 144 में से 124 सीटें जीती थीं जबकि वाममोर्चा घटक दल के उम्मीदवारों ने 13 सीटों पर कब्जा जमा लिया था। कांग्रेस महज दो सीटें जीत सकी थी।

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