मिसाइलों से लेकर गाइडेड बम तक कई स्वदेशी हथियारों के परीक्षण की तैयारी में भारत

◆ पहली बार सुखोई फाइटर जेट से होगा नई पीढ़ी की एंटी-रेडिएशन मिसाइल ‘रुद्रम-1’ का परीक्षण ◆ तेजस और मिग-29 लड़ाकू विमानों के साथ लगाई जाएगी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल ◆ स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियारों में 100 किमी. तक मार करने वाले गाइडेड बम का भी होगा टेस्ट

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नयी दिल्ली : भारत स्वदेशी रूप से विकसित कई उन्नत हथियारों का परीक्षण करने की तैयारी कर रहा है। इसमें हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, विकिरण रोधी मिसाइल से लेकर स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियारों में लंबी दूरी तक मार करने वाले गाइडेड बम शामिल हैं। इसी माह कम से कम तीन हथियारों के परीक्षण होने हैं जिनमें हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल के अलावा नई पीढ़ी की एंटी-रेडिएशन मिसाइल भी हैं।

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चीन के साथ गतिरोध शुरू होने के बाद से भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने देश में ही विकसित मिसाइलों के ताबड़तोड़ परीक्षण किये हैं। इसके बावजूद अभी भी डीआरडीओ के खजाने में कई ऐसे मिसाइल सिस्टम हैं जिनके सारे परीक्षण पूरे नहीं हुए हैं। आने वाले समय में इनके आखिरी परीक्षण करके इन्हें सशस्त्र बलों को उपयोग के लिए सौंपा जाना है। ”आत्मनिर्भर भारत” और ”मेक इन इंडिया” अभियान को पूरा करने के साथ ही यह स्वदेशी मिसाइलें चीन के साथ चल रहे गतिरोध के बीच भारत को भी रक्षा तकनीक में लगातार कामयाबी दिला रही हैं।

भारत स्वदेशी रूप से विकसित कई उन्नत हथियारों का परीक्षण इसी माह करने की तैयारी कर रहा है। इसमें हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, विकिरण रोधी मिसाइल से लेकर स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार और लंबी दूरी के ग्लाइड बम शामिल हैं। डीआरडीओ ने इस माह दृश्य सीमा से परे हवा से हवा में मार करने वाली 100-किमी. रेंज की एस्ट्रा-1 और 160 किमी. रेंज की एस्ट्रा-2 मिसाइल के परीक्षण की योजना बनाई है। इसके अलावा 150 किलोमीटर की स्ट्राइक रेंज के साथ नई पीढ़ी की एंटी-रेडिएशन मिसाइल (एनजीएआरएम) ‘रुद्रम-1’ का परीक्षण भी इस महीने के लिए निर्धारित है। 100-किमी. रेंज की एस्ट्रा-1 मिसाइल के उपयोगकर्ता परीक्षण पूरे होने के बाद रक्षा पीएसयू भारत डायनेमिक्स उत्पादन कर रहा है।

डीआरडीओ के सूत्रों के मुताबिक एस्ट्रा-2 मिसाइल को अपने कैरिज और हैंडलिंग ट्रायल के साथ-साथ ”डमी ड्रॉप्स” को पूरा करने के बाद फाइटर जेट सुखोई-30एमकेआई से पहली बार ”लाइव लॉन्च” किया जायेगा। यह पहला मौका होगा जब सुखोई जेट से रूसी हथियार के बजाय स्वदेशी मिसाइल का परीक्षण किया जाएगा। भारतीय वायु सेना ने पहले ही 250 एस्ट्रा-1 मिसाइलों का प्रारंभिक आदेश दिया है। यह मिसाइल मैक 4.5 पर ध्वनि की गति से चार गुना अधिक तेज उड़ान भरती है। तेजस और मिग-29 लड़ाकू विमानों के साथ भी एस्ट्रा-1 के एकीकरण पर कार्य चल रहा है। रुद्रम मिसाइलों को लंबी स्टैंड-ऑफ रेंज से दुश्मन की हवाई सुरक्षा नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है ताकि वायु सेना के स्ट्राइकर विमान बिना किसी बाधा के अपने मिशन को अंजाम दे सकें।

सूत्रों ने कहा कि डीआरडीओ इस साल के अंत तक अपनी सीमा को 350 किलोमीटर तक बढ़ाने के लिए ठोस ईंधन आधारित डक्टेड रैमजेट (एसएफडीआर) प्रणोदन पर आधारित एस्ट्रा-3 मिसाइल का पहला परीक्षण करने की भी योजना बना रहा है। मिसाइलों की एस्ट्रा श्रृंखला दिन और रात में फायर करने में सक्षम है। इसे लंबी दूरी पर अत्यधिक चुस्त सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों का पता लगाने, ट्रैक करने और नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो महंगे रूसी, फ्रेंच और इज़राइली मिसाइलों की जगह लेगी। डीआरडीओ 350 किमी. रेंज की रुद्रम-2 और 550 किमी. रेंज की रुद्रम-3 हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल भी विकसित कर रहा है, जिसमें आईएनएस-जीपीएस नेविगेशन भी है। रुद्रम-2 का ट्रायल भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

इसके अलावा स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियारों के परीक्षण किये जाने हैं, जो सटीक गाइडेड बम हैं। इन्हें दुश्मन के रनवे, बंकर, एयरक्राफ्ट हैंगर और राडार को 100 किमी. की दूरी तक नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। 125 किलोग्राम के यह बम उपग्रह नेविगेशन या इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इमेजिंग इन्फ्रा-रेड सीकर (ईओआईआईआर) के दो विन्यासों पर आधारित हैं, जो सुखोई या जगुआर जैसे लड़ाकू विमानों में रैक पर रखे जाते हैं। एक सुखोई जेट ऐसे 32 बम ले जा सकता है। इसके अलावा 80 किलोमीटर तक मार करने वाले 1000 किलो भारी क्षमता वाले गाइडेड बम भी विकसित किए जा रहे हैं।

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