मेरठ : महाभारतकालीन हस्तिनापुर नगरी से उत्तर प्रदेश की सियासत के भी तार जुड़े हैं। यहां से जिस पार्टी का विधायक चुनाव जीतता है, प्रदेश में उसी राजनीतिक पार्टी की सरकार बनती है। पिछले कई चुनावों से यह संयोग चला आ रहा है। इस बार प्रदेश के राज्यमंत्री दिनेश खटीक का मुकाबला सपा-रालोद गठबंधन के उम्मीदवाद योगेश वर्मा से है।

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हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र सुरक्षित श्रेणी में है। केवल दो बार 1957 और 1962 में हस्तिनापुर सीट सामान्य श्रेणी में रही। 1952 में हस्तिनापुर सीट से कांग्रेस के रामजीलाल सहायक विधायक चुने गए। 1957 में कांग्रेस के बिशम्भर सिंह और 1962 में कांग्रेस के पीतम सिंह फफंड़ा विधायक बने। 1967 में फिर से कांग्रेस के रामजीलाल सहायक ने हस्तिनापुर सीट से जीत हासिल की। 1969 में भारतीय क्रांति दल से आशाराम इंदु को विजय मिली। 1974 और 1977 में कांग्रेस के रेवतीशरण मौर्य हस्तिनापुर से विधायक चुने गए।

1980 और 1985 में कांग्रेस से हरशरण जाटव हस्तिनापुर सीट से विधायक बने। 1989 में जनता दल के झग्गड़ सिंह ने हस्तिनापुर सीट से जीत हासिल की। 1991 के उप चुनाव में भाजपा के समर्थन से गोपाल काली विधायक चुने गए। 1996 में अतुल खटीक विधायक चुने गए। 2002 में हस्तिनापुर से समाजवादी पार्टी के प्रभुदयाल वाल्मीकि विधायक चुने गए। 2007 में बसपा के योगेश वर्मा ने जीत हासिल की। 2012 में फिर से सपा के प्रभुदयाल वाल्मीकि हस्तिनापुर से विधायक बने। 2017 में भाजपा के दिनेश खटीक ने हस्तिनापुर से जीत हासिल की। इस बार फिर से भाजपा के दिनेश खटीक और सपा के योगेश वर्मा के बीच मुकाबला है।

हस्तिनापुर सुरक्षित सीट पर पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि सपा से टिकट के प्रबल दावेदार थे। एक साल पहले पूर्व विधायक योगेश वर्मा ने अपनी पत्नी मेरठ की महापौर सुनीता वर्मा के साथ सपा की सदस्यता हासिल की। तभी से योगेश को टिकट का दावेदार माना जा रहा था। योगेश ने टिकट की जंग में प्रभुदयाल को मात देकर सपा का सिंबल हासिल कर लिया। इस तरह से भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन के बीच सीधी जंग होनी तय है।

हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। हस्तिनापुर सीट पर 03 लाख 42 हजार 314 मतदाता हैं। इनमें से 01 लाख 87 हजार 884 पुरुष और 01 लाख 54 हजार 407 महिला मतदाता हैं। जबकि 23 अन्य मतदाता हैं।

हिन्दू और जैन धर्म का तीर्थ हस्तिनापुर

कौरवों और पांडवों की नगरी हस्तिनापुर हिन्दू और जैन मतावलंबियों का तीर्थंस्थल है। यहां के प्राचीन पांडवेश्वर महादेव मंदिर की बहुत महत्ता है। इस प्राचीन टीले पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण 1952 में खुदाई करके महाभारतकालीन पुरावशेष प्राप्त कर चुका है। एक बार फिर से हस्तिनापुर टीले पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन करने जा रहा है। इसके साथ ही कर्ण मंदिर, द्रौपदी मंदिर, अमृत कूप दर्शनीय हैं। प्राचीन टीले पर जयंती माता का सिद्ध मंदिर है। जैन धर्म का जम्बूद्वीप, प्राचीन दिगम्बर जैन मंदिर, प्राचीन निशिया मंदिर दर्शनीय हैं।

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