चुनाव हारने के डर से केंद्र ने वापस लिया तीनों कृषि कानून : तृणमूल

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कोलकाता : कृषि कानूनों को निरस्त करने की केंद्र की घोषणा को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद सौगत रॉय ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि आगामी पंजाब और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की पराजय के डर से यह कदम उठाया गया है।

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रॉय ने कहा, “किसान एक साल से विरोध कर रहे थे। आंदोलन करते हुए कई लोग मारे गए। भाजपा के मंत्री के बेटे ने लखीमपुर में लोगों को कुचल दिया। हमें खुशी है कि आखिरकार कानून निरस्त हुआ। तृणमूल ने इसका लगातार विरोध किया था। यह किसानों और भारत के लोगों की जीत है।”

तृणमूल सांसद ने कहा, “सरकार को यह पहले करना चाहिए था। प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी चुनावों में हारने के डर से कानूनों को निरस्त कर दिया। वे जानते थे कि इससे (कृषि कानूनों) पंजाब और उत्तर प्रदेश में उनका नुकसान होगा।”

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी इसे लेकर किसानों का अभिनंदन किया। शुक्रवार शाम उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “हमारे किसानों की ताकत और बढ़ी है। उनके लंबे और कठिन संग्राम की बदौलत आज प्रधानमंत्री यह फैसला लेने के लिए मजबूर हुए हैं। तमाम प्रतिकूल दावों के बावजूद किसानों ने भारतीय जनता पार्टी को उनकी असली जगह दिखा दी है। इसके लिए किसानों के साहस को अभिनंदन।”

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने उन किसानों को अपना समर्थन दिया था जो केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

बनर्जी ने इस साल की शुरुआत में कोलकाता में भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत से भी मुलाकात की थी। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सिंघू बॉर्डर का दौरा किया था। तृणमूल संसद में भी कृषि कानूनों के खिलाफ मुखर रही है।

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